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Showing posts from January, 2021

इतिहास क्या है

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इतिहास क्या है? इतिहास क्या है  हर किसी का कुछ ना कुछ इतिहास है। जैसे मानव का इतिहास , किसी सभ्यता का इतिहास , किसी वस्तु का इतिहास , किसी देश का इतिहास ।  इतिहास के जनक हेरोटोड्स है इतिहास सबका है पर उस को देखना का नजरिया सबका अलग है। किसी देश या सभ्यता के बारे सभी के अलग अलग नजरिए है। इतिहास दो शब्दों से मिलकर बना । इति+हास  अतीत में हुई घटना को इतिहास कहते है।  अब इस इतिहास को जानने के कुछ ना कुछ स्रोत होते है।  जैसे कोई सभ्यता है  जब उस सभ्यता की खुदाई की जाती है तब कुछ ना कुछ अवशेष मिलते है उसके आधार पर कहते है कि वह एक सभ्यता है । वहा से मिली वस्तु की कार्बन डेटिंग की जाती है उसके आधार पर कहा जाता है कि ये सभ्यता कितनी पुरानी है।  किसी भी देश या सभ्यता के इतिहास को जानना बहुत कठिन है।  इतिहास को जानने के स्रोत क्या क्या है। इतिहास के स्रोत को तीन भागों में बांटा है पुरातात्विक स्रोत  इन स्रोत में सिक्के अभिलेख लिपि , मुहर, आदि । साहित्यिक स्रोत किसी देश में लिखी गई पुस्तक ओर ताम्र लेख । विदेशी विवरण  किसी ना किसी देश में कोई ना कोई...

भारत में स्कूल ओर कॉलेेज कब तक खुलेंगे

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सभी बच्चो का यह सवाल की स्कूल ओर कॉलेज कब तक खुलेंगे   भारत करोना  वायरस आने के बाद सारे स्कूल 22 मार्च 2020 से बंद कर दिए गए उसके बाद सम्भावना लगाई गई की जुलाई में स्कूल खुल जाएंगे लेकिन नहीं । बाद में भारत सरकार ने स्कूल खोलने की जिमेदरी स्कूल के अध्यापक पर  छोड़ दी। स्कूल आध्यपको ने अविभावक से मीटिंग की ओर उनकी राय ली । अविभावक ने कहा कि जब तक वेक्सीन नहीं आ जाती तब तक हम अपने बच्चो को स्कूल नहीं भेजेंगे।  नवम्बर में भारत सरकार ने 11ओर 12 क्लास के छात्रों के लिए स्कूल खोल दिए ये फैसला छात्रों ओर अविभावक पर था कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते है या नहीं। मार्च से लेकर नवम्बर तक 10ओर 12 की क्लास ऑनलाइन ली जाती थी । नवम्बर में स्कूल खुल जाने के बाद इनकी क्लास ऑफलाइन होने लगी इसके लिए स्कूल प्रबंधन को सचेत किया गया ओर पूरी जिम्मेदारी स्कूल को दी गई। अब 10ओर 12 की क्लास ऑफलाइन होने के बाद स्कूल ओर सरकार फैसला लेने वाली है की 9ओर11 की क्लास ऑफलाइन शुरू की जाएं  साथ ही कॉलेज खोलने का भी फैसला लेने वाली है भारत सरकार । 15 नवम्बर  से कालेज सिर्फ प्रेक्...

उत्तराखंड का इतिहास प्राचीन काल से वर्तमान तक

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उत्तराखंड एक हिमालिय राज्य है ये देश का 11 हिमालय राज्य है। उत्तराखंड में अनेक जातियों और राजवंश ने राज किया। यहां की प्राचीन जाति कोल किरात थी । भोटिया को भी यहां को प्राचीन जनजाति माना जाता है । उत्तराखंड में नागो ने भी राज्य किया था चमोली से नाग जाति का लेख मिला है। उत्तराखंड में बौद्ध धर्म के अनयायियों को तपस्या करने के लिए भेजा जाता था।  उत्तराखंड से कई सारे प्राचीन गुफा ओर शैल चित्र मिले है अल्मोड़ा से लघुउदियार जहा मानव ने नृत्य करते हुए चित्र अंकित है जो सुयाल नदी के किनारे स्थित है। चमोली ओर उत्तरकाशी से भी गवरखा गुफा जहा लाल रंग की आकृति मिली है। समुदरगुप्त की प्रायग प्रशस्ति में उत्तराखंड का उलेख मिलता है । हेनसाग ने भी हरिद्वार को मायापुरी कहा है। उत्तराखंड का सबसे प्राचीन राजवंश कुंडिद राजवंश था । इसके ज्यादा अभिलेख नही मिले है कुछ मुद्राएं प्राप्त हुई है जैसे अल्मोड़ा प्रकार की मुद्रा , छत्रेश्वर प्रकार की मुद्रा , अमोघभूती प्रकार की मुद्रा ये कुडिंद राजवंश का राजा था। इन मुद्राओं से इस राजवंश की जानकारी मिलती है। उत्तराखंड का दूसरा प्राचीन राजवंश कत्यूरी राजवंश है इस...

भारत में बढ़ती जनसंख्या के फायदे ओर नुकसान

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      भारत जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया का दूसरा देश है भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है बड़ती जनसंख्या के जितने लाभ है उसे ज्यादा हानि है। किसी देश को अधिक जनसख्या के क्या लाभ हो सकते है आसानी से श्रमिक मिल जाना अधिक जनसंख्या वाले देश को सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि उसे शारीरिक श्रम करने वाले मजदूर आसानी से मिल जाते है। भारत के पास पूंजी कम है ओर मजदूर की संख्या अधिक है। भारत के कई लोग काम की तलाश में दूसरे  देश में जा रहे है । दूसरे देश में भारतीय श्रमिक को ये फायदे होते है कि  वहा उन्हें भारत के अपेक्षा  दूसरे देश में अधिक मजदूरी मिलती है जैसे कनाडा अमेरिका ऑस्ट्रेलिया जितने डॉलर मुद्रा वाले देश है इन देश में भारतीय श्रमिक काम के लिए जा रहे है। इन देशों में भारतीय श्रमिक के जाने के कई कारण है जैसे इन देशों में  श्रमिक की संख्या कम है ओर इन देशों के पास पूंजी बहुत अधिक है ओर इन देशों को श्रमिक की आवश्यकता होती है । इन देशों की जनसंख्या कम है इसलिए भारतीय श्रमिक को यहां आसानी से काम मिल जाता है। अधिक जनसंख्या वाले देश को दूसरा लाभ यह होता है कि देश...

भारत में जनजातीय आंदोलन

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जनजातीय  आंदोलन - जनजाति से आशय ऐसे नृजातीय समूह से होता है को किसी देश विशेष की मुख्य धारा  अलग होता है  । आधुनिक भारतीय इतिहास में  जनजाति शब्द का प्रयोग भारतीय  समाज की मुख्य  विशेषता- जातीय  व्यवस्था  से भिन्न समाज के लिए किया जाता था, जनजातीय  समुदाय भारतीय जीवन की मुख्य धारा के  पर्थक थे। इन समाजों  में सामाजिक एकता विद्यमान थी जबकि भारत के मुख्य समाज में सामाजिक स्तर पाया जाता था जबकि  जनजातीय समाज मुख्य समाज से पृथक रहा माना जाता है किन्तु  यह पूर्णतः  पृथक कुछ शिकार  एवम् खाद्य संगृहक  जनजाति के संदर्भ में ही सत्य है। इनके अतिरिक्त अन्य जनजातीय समाज प्राचीन काल से ही भारतीय समाज के अंग रहे है, इस कारण  इन समाजों में हिंदू समाज की अन्य विशेषताएं पाई जाती है क्योंकि ये जनजातीय  ऐतिहासिक काल से ही  मुख्य समाज के साथ  जुड़ी है। आधुनिक भारत में जनजातीय  द्वारा कृषकों एवं अन्य समुदाय की तुलना में अधिक विद्रोह  किया जाता था ओर उनके विद्रोह हिंसक भी होते थे। आधुनिक भारत में ये ...

Theosophical Society (थियोसोफिकल सोसायटी)

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थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका में मैडम एच. पी . ब्लवात्सकी ओर एस. ओलकाट द्वारा की गई। बाद में ये भारत आ गए  तथा 1886 में मद्रास के करीब अदियार  में उन्होंने सोसायटी का प्रधान स्थापित किया। 1893 में भारत में आने वाली  श्रीमती एनी बेसेंट के नेतृत्व में थियोसोफी आंदोलन जल्द भारत में फैल गया । थियोसोफिस्ट प्रचार करते थे की कि हिंदुत्व, पारसी, मत तथा बौद्ध मत जैसे प्राचीन  धर्मो को पुनर्स्थापित तथा मजबूत किया जाय। उन्होंने आत्मा के पुनरागमन के  सिद्धांत का भी  प्रचार किया । भारत में श्रीमती एनी बेसेंट के प्रमुख कार्यों मै एक था बनारस में केन्द्रीय हिन्दू कालेज की स्थापना , जिसे बाद में मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया।

Young Bengal Movement. (यंग बंगाल आंदोलन)

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इसकी स्थापना 1826 में बंगाल में की गई, जिसका उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता , जमींदारों द्वारा किए जा रहे अत्याचारो से रैयत  की  सुरक्षा , सरकारी नौकरी में ऊंचे वेतन के अंतर्गत भारतीय लोगो को नौकरी दिलवाना था। इसकी स्थापना  हेनरी विवियन डेरोजियो ( 1809-31) ने की थी । एगोलोइंडियन डेरेजियो ' हिंदू कालेज ' में अध्यापक थे, ये फ्रांस की क्रांति से बहुत प्रभावित थे।  इन्होंने  आत्म विस्तार एवम् समाज सुधार हेतु ' एकेडमिक एसोसियेशन  एवम्  सोसायटी फॉर द एक्विजिशन of जनरल नॉलेज  की स्थापना की , इसके अलावा भी डेरेजियो ने एग्लो इंडियन हिंदू एसोसिएशन  बंगाहित  सभा डिबेटिंग क्लब का गठन किया । तत्कालीन भारत के कट्टर हिंदुओं ने डेरेजियो के विचारो का विरोध किया। डरेजियो ने ईस्ट इंडिया नामक दैनिक पत्र का भी संपादन किया।

भारत में सामाजिक ओर धार्मिक सुधार आंदोलन (Social and Religious Reform Movement in India)

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राष्ट्रवादी भावनाओ का विकास नई आर्थिक शक्तियों का उदय शिक्षा का प्रसार आधुनिक पश्चिमी विचारो तथा संस्कृति का प्रभाव तथा विश्व के बारे में पहले से अधिक जानकारी , इन सभी बातों ने भारतीय समाज के पिछड़ेपन तथा पतन के बारे में लोगों की चेतना को बढ़ाया ही नहीं , बल्कि सुधार के संकल्प को और मजबूत किया। ब्रह्म समाज  राजा राममोहन राय ने 1829 ई में ब्रह्म सभा नाम से एक नए समाज की स्थापना की । जिसे आजे चलकर ब्रह्म समाज के नाम से जाना गया। राजा राममोहन राय की उस परम्परा को 1843 के बाद देवेंद्रनाथ ठाकुर ने आगे बढाया । उन्होंने  इस  सिद्धांत का खंडन किया की वैदिक ग्रंथ अनुल्लघनिय हैं। 1866 के बाद इस आंदोलन को केशव चन्द्र सेन ने जारी रखा। आदि ब्रह्म समाज  (ब्रह्म समाज के विभाजन के बाद) इसकी स्थापना 1866 में आचार्य केशव चन्द्र सेन कलकता में की गई जिसका उद्देश्य स्त्रियो की मुक्ति , विद्या का प्रसार ,सस्ते साहित्य को बांटना  महा निषेध , दान देने पर अधिक बल देने था। 1878 में केशव चन्द्र सेन ने अपनी तेरह वर्षीय अल्पायु पुत्री का विवाह  कूचबिहार  के महाराजा केंसाथ वैदिक री...

एक अच्छे YouTuber केसे बने

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एक अच्छे यूटूबर कैसे बने आजकल सब यूट्यूब पर वीडियो बनाते है कुछ लोगो का  शौक होता है वीडियो बनाना तो कुछ लोग ऐसे भी होते है जो लोग यूट्यूब वीडियो के माध्यम से पैसा कामना चाहते है। एक अच्छे युटूबर बनने के तरीके वीडियो सर्च अगर आप यूट्यूब ओर प्रसिद्ध होना चाहते है तो आप को अपनी वीडियो शेयर करने के बजाय लोगो से सर्च करवानी चाहिए इससे आपकी वीडियो लोगो की सर्च लिस्ट में जाएगी जिससे आपकी वीडियो रैंक करेगी जितनी अच्छी रैंक होगी वीडियो की उतने ही अच्छे व्यू आएगे आपकी वीडियो में । वीडियो सर्च करने के फायदे ये है कि वीडियो सर्च लिस्ट में चली जाती है जिसे यूटयूब सबसे ऊपर उठता है । थम बेनल जब आप वीडियो बनाते है तो उस वीडियो में थंबनेल होना जरूरी है ताकि लोगो को पता चले की वीडियो किस विषय पर बनाई गई है जितना अच्छा वीडियो थम बेनल होगा । वीडियो में व्यू आने की संभावना होगी।