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बिज़नेस के लिए वेबसाइट क्यो बनाते है

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बिज़नेस को बाजार में लाने के लिए वेबसाइट का चयन क्यो करते है। क्या आपके पास ऑनलाइन उपस्थिति के बिना एक व्यवसाय है?  खैर, आप संभावित ग्राहकों, मुनाफे और बिक्री को याद कर रहे हैं।  आज की दुनिया में, कई कंपनियां ऑनलाइन मार्केटिंग को अपनाती हैं।  आपकी ऑनलाइन मार्केटिंग रणनीति में सोशल मीडिया और वेबसाइट महत्वपूर्ण उपकरण हैं।  वे एक फर्म के ब्रांड के निर्माण के लिए प्रभावी हैं।  हालाँकि फेसबुक जैसी वेबसाइट और सोशल मीडिया दोनों ही दर्शकों तक पहुँचने के लिए सक्षम हैं, आपके व्यक्तिगत लक्ष्य सबसे अच्छे विकल्प को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।  अपने व्यवसाय के विपणन के लिए फेसबुक पर वेबसाइट चुनने के कई कारण हैं।  कुल ब्रांड नियंत्रण  एक अच्छी तरह से प्रबंधित वेबसाइट एक फर्म की छवि को बेहतर बनाने में मदद करती है।  एक वेबसाइट के माध्यम से, आप एक ब्रांड की कहानी, दृष्टि और मूल्य बना सकते हैं।  वेबसाइटों में मान्य जानकारी ग्राहकों को बेहतर उत्पादों को समझने में मदद करती है।  इसलिए, आप अपने फर्म के उत्पादों और सेवाओं के लिए ग्राहक की धारणा ...

भारत में पत्र पत्रिकाओं का विकास

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भारत में प्रकाशित पत्र पत्रिकाएं भारत में पत्रिकाओं का विकास पुर्तगालियों के  आने के बाद शुरू हुआ है।  पुर्तगालियों ने सर्वप्रथम गोवा में मुद्रा टंकण की स्थापना की थी बंगाल गजट  और हिक्की गजट 29 जनवरी 1780 को  इस पत्रिका का संपादन हुआ।  यह सप्ताहिक पत्रिका थी और अंग्रेजी भाषा में थी।  इसके संपादक  10 आगस्टक  ही थे।  यह भारत का पहला समाचार पत्र   था। उदंत मार्तंड   इस पत्रिका का संपादन  युगल किशोर शुक्ला ने 30 मई   1826, में किया।   यह भारत का पहला   हिंदी समाचार पत्र था।  यह सप्ताहिक पत्र था। बंगदूत  1829 में  राममोहन राय ने एक साथ चार भाषाओं में बंगाली उर्दू का अंग्रेजी में  यह पत्र छापा।   यह एक साप्ताहिक पत्र था और यह कोलकाता से छपता था बनारस अखबार 1849 में  जो पत्रकार काशी से प्रकाशित हुआ।  इसके संपादक  राजा शिवप्रसाद थे।  यह हिंदी क्षेत्र से प्रकाशित होने वाला पहला हिंदी समाचार पत्र था। समाचार   सुधावर्षण 1854 में  समाच...

भारत में शिक्षा का विकास

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प्राचीन भारत में शिक्षा की वृद्धि और विकास का  इतिहास 18 वीं शताब्दी में  भारत में हिंदू और मुस्लिम शिक्षा केंद्र   लुप्त हो गए थे।  देश में अनेक राजनैतिक उथल-पुथल के कारण  ऐसी अवस्था हो गई थी जी शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही विद्या उपार्जन में ना लग सके। 21 फरवरी 1784 को  लिखे एक पत्र में वारेन हेस्टिंग्स ने   कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया कि उत्तर के सभी प्रमुख नगरों में विद्यालय धन जन और भवन सभी प्रकार के अभाव   खराब अवस्था में है। यद्यपि कंपनी 1765 से राज्य करने लगी थी परंतु उसने समकालीन इंग्लैंड की परंपरा के अनुसार विद्या आभार निजी हाथों में ही रहने दिया फिर भी समय-समय पर कंपनी के अधिकारी कोट ऑफ डायरेक्टर का ध्यान इस ओर आकर्षित करते रहे। 1781  वारेन हेस्टिंग ने  कोलकाता मदरसा स्थापित किया  फारसी  और अरबी का था।  17 साल का 90 मैं बनारस की ब्रिटिश रेजीमेंट श्री  डंकन के प्रयत्नों के फल स्वरुप बनारस में एक संस्कृत की स्थापना की गई।  जिसका उद्देश्य हिंदुओं के धर्म  ...

जूस की दुकान का बिजनेस

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जूस की दुकान का बिजनेस कैसे करें किसी भी बिजनेस करने से पहले  कुछ बातों को  जान लेना जरूरी होता है  अगर हम  इन बातों पर  ध्यान नहीं देते हैं तो  हमारा बिज़नेस  ज्यादा  तरक्की नहीं कर पाता। आज हम बात कर रहे हैं जूस की दुकान का बिजनेस  कैसे  करें । जूस की दुकान की शुरुआत कैसे करें? यह जरूरी नहीं है कि शुरुआत में ही आप  एक बड़ी दुकान खोलने  आप एक  छोटी सी  दुकान खोल कर भी इस बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं छोटी छोटी सी शुरुआती बड़ी  बन जाती है।  शुरुआत में ज्यादा पैसा लगाने की जरूरत नहीं है   बल्कि धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए।   जूस की दुकान  खोलने से पहले कई बातों का ध्यान देना जरूरी होता है जैसे -  स्टेप वन  लोकेशन अगर आप जूस की  दुकान खोलना चाहते हैं तो  आपके पास  एक अच्छी लोकेशन का होना  जरूरी होता है।  लोकेशन किस प्रकार की होनी चाहिए जूस की दुकान  के लिए बहुत सारी लोकेशन है जैसे 1.  जिम  -   जूस की दुकान के लिए सबसे  अच्छी लोकेशन...

गोरखा काल के समय लगाए गए कर

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गोरखा काल में लगाए गए कर किसी भी  अथवा शासक के लिए  राजकोष भरना आवश्यक होता है। बिना  राजकोष के राज्य नहीं चलता है।  गोरखा शासक ने इस नीति का पालन किया और  रैयत पर अनेक कल लगाए ।  यह कर गोरखा की का प्रमुख साधन थे।  उनसे पूर्व  उत्तराखंड में  राज कर रहे चंद शासकों ने  36 रकम 32 कलम  वाले अनेक का कर  लगाई थे। चंद्र शासकों में लक्ष्मीचंद ऐसा राजा   जिसके करो  के भय से  लोगों ने छतों में मिट्टी डालकर साग सब्जी लगाना प्रारंभ कर दिया।  गोरखा ने कुछ कर पुराने  और कुछ तत्कालीन कारणों की ओर ध्यान देते हुए कुछ   नए कर लगाए । नए करो  में   ब्राह्मणों में "कुशही"  नामक का लगाया जो जूलिया 260 नाली तक जमीन हत्याई हुए ब्राह्मणों पर  ₹5 प्रति मवासा लगाया गया। गोरखा  ने  कुमाऊं व गढ़वाल  में  छत पर चढ़ने वाली महिला  को  दंडित करने के लिए   जुर्माने के रूप में कर लगाया।  गोरखा द्वारा उत्तराखंड में कई प्रकार के कर लगाए गए थे जैसे पुगड़ी क...

सचिन तेंदुलकर

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सचिन तेंदुलकर  सचिन तेंदुलकर भारत के एक महान क्रिकेटर है, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से  सम्मानित होने वाले  वह   पहले खिलाड़ी और सबसे  कम उम्र के व्यक्ति हैं।  जन्म की तारीख  24 अप्रैल 1973  जन्म स्थान  मुंबई  पिता का नाम  रमेश तेंदुलकर  माता का नाम   रजनी  तेंदुलकर  पत्नी का नाम अंजली तेंदुलकर  बल्लेबाजी की शैली  दाएं हाथ  गेंदबाजी की  शैली  दाएं हाथ लेग ब्रेक   सचिन तेंदुलकर के उपनाम   सचिन तेंदुलकर को कई नाम से जाना जाता है  क्रिकेट के भगवान,  मास्टर  ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, लिटल  चैंपियन।  सचिन तेंदुलकर का प्रारंभिक जीवन  सचिन तेंदुलकर का जन्म मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ है। इनकी शिक्षा  मुंबई में  हुई है। सचिन तेंदुलकर  के बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ने सचिन को क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया था। सचिन के  एक भाई  नितिन तेंदुलकर और बहन  सविताई  तेंदुलकर है।  सचिन ते...

buddh dhram बौद्ध धर्म

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बौद्ध धर्म ( buddh dhram) गौतम बुद्ध का जीवन  चरित्र  जिसने ब्राह्मण धर्म को सबसे भारी आघात पहुंचाया था, महावीर के प्रसिद्ध समकालीन गौतम बुद्ध द्वारा प्रारंभ किया गया था। नेपाल की तराई में कपिलवस्तु के शाक्य   जाति के शुद्धोधन के पुत्र थे। उनकी  माता   पाशर्वृत  कोलीय  कुल की राजकुमारी थी कपिलवस्तु से कुछ मील दूरी लुंबिनी ग्राम में 566  ईसा पूर्व मैं उनका जन्म हुआ था।   यह  स्थान आज सम्राट अशोक के रूमिंदेह  स्तम्भ पर 249  ईसा पूर्व अभिलेख है ,  सुशोभित है।  प्रसव पीड़ा से माता का देहांत हो गया  तू इनका पालन-पोषण इनकी मौसी गौतमी ने किया। इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। बाल्यकाल से ही सिद्धार्थ में चिंतन प्रवृत्ति दयालुता के लक्षण दृष्टिगोचर होने लगी।   गौतम बुध का विवाह यशोधरा नामक सुंदर राजकुमारी से  हुआ।  अपनी आयु के 29 वें वर्ष  533  ईसा पूर्व सन्यासी जीवन द्वारा सत्य की खोज करने के लिए अपना घर छोड़ दिया। गृह त्याग  महाभिनिष्क्रमण  के नाम से प्रसिद्ध है। निर...